Reverend Shri Gurudev begins Tapasya from 16th December 2017 परम श्रद्धेय श्री गुरुदेव के तपस्या १६ दिसम्बर २०१७ से प्रारम्भ

Press Conference

 

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Plan to kill Br.Aatmbodhanand: taken away from Ashram forcibly ब्र आत्मबोधानंद जी को मारने की तैयारी : जबरन आश्रम से उठाया गया

Aatmbodhanandji being forcibly taken a

ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद को मारने की तैयारी। 11:30 बजे यहाँ से जबरन ले जाया गया है, उसे पीने के लिए पानी तक नही उपलब्ध करवाया जा रहा है, न कोई सेवा करने वाला है और उसे अभी तक एम्बुलेंस में ही रखा है।
उन्हें शारीरिक और मानसिक पीड़ा पहुँचाई जा रही है।
रात भर वे सो नहीं पाए इस आशंका से कि ये लोग कब आ जाएं तथा रातभर कहीं डीजे भी बजता रहा जिसे सूचना देने पर भी बंद नहीं करवाया गया और सुबह में देर से उठने के कारण अपना नित्य नैमितिक कर्म भी नहीं कर पाए थे तथा जल भी नहीं ले पाए थे। जिस समय उन्हें जबरन ले जाया गया उस समय परमादरणीय श्री गुरुदेव स्नान हेतु गंगाजी के तट पर स्नान कर जप कर रहे थे और मैं, ब्रह्मचारी दयानंद, उनके साथ गंगा तट पर ही था।

Today at 11:30 am Br Aatmbodhanand ji was forcibly taken away from Ashram premises. He has not been given even water, nobody to take care of him and he is still kept inside ambulance.
He is being tortured physically and mentally.

Yesterday night he was unable to sleep properly as he was apprehensive of the torture by the administration and police and sound pollution by DJ whole night which was not checked despite informing several times. Hence he got up late in the morning and he couldn’t even complete his daily freshening up duties and even taking water, he was forcefully taken away. At that time Shri Gurudev was doing japa after taking bath at the bank of Ganga and I, Br Dayanand was with him at the bank of Ganga.

तपस्या 08वें दिन जारी रहा

ब्रह्मचारी आत्मबोधानन्द की तपस्या का 8वां दिन है। आज गंगा रक्षा के इस पावन कार्य में ग्राम जगजीतपुर के वासिन्दे दिन भर आते रहे। लगभग 100 से ज्यादा लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई और इस तपस्या के सफल होने की कामना की। इसके अलावा भारतीय किसान यूनियन, जगजीतपुर ग्राम बचाओ संघर्ष समीति एवं जनसंघर्ष मोर्चा के दर्जनों पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं ने भी मातृ सदन आकर लिखित में इस तपस्या को अपना समर्थन प्रदान किया।
दूसरी तरफ खनन व स्टोन क्रेशर माफियाओं का प्रशासन एवं स्थानीय पुलिसकर्मी के साथ अनोखा गठजोड़ सामने आया है। शाहपुर शीतला खेड़ा स्थित एक स्टोन क्रेशर के द्वारा 30×20 मीटर की खेती की भूमि को मशीनों से खोदकर 15 फुट गड्ढ़ा बना दिया गया है और उस समय भी लोडर से अवैध खनन कर माल स्टोन क्रेशर पर ले जाया जा रहा था जिसका प्रमाण विडियो रिकार्डिंग बनाने हेतु उसी गाँव का एक युवा गया तो स्टोन क्रेशर वालों ने उसे पकड़कर उसके साथ हाथापाई कर दी उल्टा पुलिस बुला लिया और उसका मौबाईल छीनकर उस विडियो को हटा दिया और पुलिस के सामने धमकी दी कि कोई उसके काम नहीं आयेगा। युवक ने इसकी शिकायत श्रीमान मुख्य सचिव, श्रीमान पुलिस महानिदेशक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से की है। इस पत्र में इस युवक ने खनन से हो रहे अपूरणीय क्षति का जिक्र अपनी ही भाषा में साफ व स्पष्ट रूप से किया है। इस घटना में एक दारोगा संग तीन पुलिस कर्मियों के नाम आ रहे हैं जो इस प्रकार हैः- अमित रावत, विनोद और राठी, ये तीनों भिक्कमपुर चैकी पर तैनात बताये जा रहे हैं। इन तीनों ने अपने सामने अवैध खनन होते हुए भी उसके विरुद्ध कार्यवाही करने की बजाये स्टोन क्रेशर मालिकों से कृत्य कृत्य होकर उसके गैरकानूनी कार्यों को प्रश्रय दिया।
ऐसी ही एक दूसरी घटना भी सामने आई है। ग्राम भोगपुर का एक किसान का खेत दुर्गा स्टोन क्रेशर से सटे एक खेत से लगा हुआ है। स्टोन क्रेशर से लगे उक्त खेत में राजेन्द्र ने उक्त सटे हुए खेत में 25-30 फीट गहरा गड्ढ़ा कर दिया जिसके कारण बरसात में उक्त किसान का खेत किनारों से धँसना शुरु हो गया। उक्त किसान ने मातृ सदन को बताया कि वह कई बार जिलाधिकारी व अन्य अधिकारी से इसकी लिखित शिकायत कर चुका है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती है। उल्टे खनन करने वाले लोग उसको धमकी देते हैं कि उसके परिवार के लिये ये सब अच्छा नहीं होगा। किसान ने मातृ सदन से अपने खेत को खनन से बचाने का निवेदन लिखित में किया है। कुल मिलाकर यहाँ के जिलधिकारी श्री दीपक रावत और उपजिलाधिकारी श्री मनीष कुमार सिंह माफियाओं के अवैध हित साधने में जोरदार ढंग से लगे हैं। यही कारण है कि बारम्बार प्रमाण के साथ शिकायत के बाद भी अवैधरूप से चल रहे इन स्टोन क्रेशरों को सीज नहीं किया गया है।

ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद की तपस्या आज 7 वें दिन भी जारी, आज एक और स्टोन क्रेशर के अवैध खनन का हृदय विदारक विडियो

ब्रह्मचारी आत्म्बोधानंद की तपस्या आज 7 वें दिन भी जारी रही|आज एक और स्टोन क्रेशर के अवैध खनन का हृदय विदारक वीडियो: किस हिसाब से हरिद्वार की धरती को तालाब में परिवर्तित किया जा रहा है, यह विडियो जिलाधिकारी हरिद्वार को भेजा जा चुका है लेकिन वे कोई कारवाई नही करेंगे क्योंकि ये सब उन्हीं के द्वारा पोषित है|

तीर्थ नगरी] कुँभ नगरी] धर्म नगरी] गंगाद्वार हरिद्वार में समस्त कानूनों को ताक पर रखकर राजनीतिक संरक्षण में धड़ल्ले से जारी सर्वथा अवैज्ञानिक एंव अवैध खनन तथा अवैध स्टोन क्रशिंग का काला कारेबार। तपस्या 6 वें दिन भी जारी |

वीडियो Video
खनन का साक्षात प्रमाण
समस्त कानूनों को टाक पर रख कर रात्रि में खनन

गंगाजी में एक भी पत्थर और बोल्डर उपर से लुढ़ककर नहीं आता है, एक नहीं दो वैज्ञानिक रिपोर्ट इस सत्य को प्रमाणित भी कर चुकी है, फिर भी गंगाजी एवं किनारे के अतिउपजाऊ खेती की भूमि में अवैज्ञानिक और अवैध खनन का कारोबार नहीं रुका। इस अवैध खनन के पीछे मुख्य कारक इन क्षेत्रों, बिशनपुर-बिशनपुरकुण्डी-श्यामपुर-सज्जनपुरपीली-टाण्डाभागमल-टाण्डा महातौली-भोगपुर गंगाजी से 05 किलोमीटर की दूरी के अन्दर स्थित 24 अगस्त 2017 की प्रशासनिक आँकड़ा के अनुसार 44 स्टोन क्रेशर हैं।
उल्लेखनीय है कि दिनांक 26 मई 2011 को माननीय उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने मातृ सदन की विशेष याचिका संख्या 03/2011 को स्वीकार करते हुए कुम्भ क्षेत्र में खनन एवं स्टोन क्रशिंग पर प्रतिबन्ध की पुष्टि की और जिलाधिकारी हरिद्वार को आदेश के अवलोकनों के दृष्टिगत आवश्यक कदम उठाने को कहा। 16 दिसम्बर 2014 को कुम्भ क्षेत्र में खनन एवं स्टोन क्रशिंग पर प्रतिबन्धपरक आदेश में माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली द्वारा बरकरार रखने के पश्चात तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल के आदेश के अनुपालन अपनी संस्तुति शासन को भेजते हुए भोगपुर तक गंगाजी से 05 किलोमीटर की दूरी तक स्टोन क्रेशर को प्रतिबन्धित करने हेतु भेजी, परन्तु गंगाजी का सीना चीड़कर कमाये गये अवैध धन सरकार के नुमाईन्दों और शासन एवं प्रशासनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को पहुँचाकर कोई कार्रवाई नहीं होने दी गई। गंगाजी तथा इस क्षेत्र की पारिस्थितिकी, जैवविविधता, पर्यावरण, वन, जंगली प्राणी, हरे-भरे खैर-पलाश-शीशम आदि के वृक्षों से भरपूर अनादिकाल से विद्यमान कितने ही टापुओं को खनन कर नष्ट किया जाता रहा। केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड (सी0पी0सी0बी0) एवं उत्तराखण्ड प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड द्वारा इस क्षेत्र की वृहद् सर्वेक्षण कराने और खनन पर रोक लगाने के निर्देश जारी किये गये लेकिन वे निर्देश में गंगाजी का सीना चीड़कर कमाये गये अवैध धन के बल पर दबा दिये गये।
अपरिहार्य परिस्थिति में केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड ने संविधान प्रदत्त अपने अधिकार पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 5 के तहत आज्ञापक निर्देश उत्तराखण्ड के अधिकारियों को भोगपुर तक खनन बन्द रखने और माननीय उच्च न्यायालय उत्तराखण्ड के आदेश के अनुपालन में जिलाधिकारी हरिद्वार की सुस्तुति के अनुसार गंगाजी से 5 किलोमीटर की दूरी तक स्टोन क्रेशरों को तत्काल बन्द करने के दिये, परन्तु इस निर्देश का भी उल्लंघन हुआ।
दिनांक 3 मई 2017 को माननीय उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका संख्या में सी0पी0सी0बी0 के निर्देश को सख्ती से लागू करने को कहा तब भी इसे लागू नहीं किया गया। मातृ सदन ने इसके विरुद्ध मा. उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका योजित की और उसमें कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद भी अनुपालन नहीं किया गया। बल्कि वर्तमान जिलाधिकारी हरिद्वार ने अपने जवाब में बचकाना और मुर्खतापूर्ण तर्क प्रस्तुत किये। उदाहरणार्थ जिलाधिकारी हरिद्वार का अपने जवाब में कहना कि जैसा कि जिलाधिकारी हरिद्वार द्वारा अवगत कराया…, प्रश्न उठता है कि क्या जिलाधिकारी हरिद्वार को इतना भी ज्ञान नहीं है कि एक जिला में एक ही जिलाधिकारी होता है फिर कौन जिलाधिकारी इनको अवगत कराया। अन्ततः मानननीय उच्च न्यायालय के द्वारा दिनांक 24 अगस्त 2017 को 24 घण्टा में अनुपालन रिपोर्ट देने के लिये कहने पर प्रमुख सचिव उद्योग श्री आनन्द बर्द्धन ने एक शासनादेश जारीकर माननीय उच्च न्यायालय के आदेश दिनांकित 3 मई 2017 और सी0पी0सी0बी0 के निर्देश दिनांकित 6 दिसम्बर 2016 के अनुपालन में 44 स्टोन क्रेशर बन्द करवाये गये।
इस बीच उत्तराखण्ड सरकार और खनन माफिया एक साथ मिलकर माननीय उच्च न्यायालय नैनीातल के आदेश दिनांकित 3 मई 2017 के विरूद्ध पुनर्विचार याचिका योजित किये और बड़े-बड़े सीनीयर वकीलों को अपने पक्ष में खड़ा किये। माननीय उच्च न्यायालय ने पुनर्विचार याचिका को, चूँकि वास्तविक याचिका श्मशानघाट और ग्रामपंचायत की भूमि का था उसमें सी0पी0सी0बी0 का आदेश हुआ था और सरकार से जवाब नहीं लिया जा सका था, स्वीकार कर अपना पूर्व का आदेश दिनांकित 3 मई 2017 वापस अवश्य लिया लेकिन साफ निर्देश दिया कि सी0पी0सी0बी0 का आदेश यथावत रहेगा, बल्कि शासन-प्रशासन को अवैध क्रशिंग और अवैध खनन के विरुद्ध और सख्त कार्रवाई करने को कहा।
इसके बावजूद पहले तो स्टोन क्रेशरों को तैयार माल बेचने की छूट दी गई और भारी-लेन देन के परिणाम स्वरूप फिर 16/10/2017 को दीवाली का तोहफा देते हुए स्टोन क्रेशरों को पुनः खोल दिया गया। ऐसा करके श्री आनन्द बर्द्धन, प्रमुख औद्योगिक सचिव, ने माननीय न्यायालय में विचाराधीन अवमानना याचिका में दिये गये अभिकथन कि सी0पी0सी0बी0 के निर्देश का अनुपालन कर दिया गया है, का उल्लंघन किया है जिसके विरुद्ध एक और अवमानना याचिका माननीय उच्च न्यायालय में योजित हुई है। वहीं जिलाधिकारी हरिद्वार श्री दीपक रावत ने गंगाजी में खनन खोले जाने की तैयारी की बात पेपर में कथन देकर प्रकाशित करवाया था जो पुनः माननीय न्यायालय में दिये गये अभिकथन की अवमानना है, अतः उनको भी पक्षकार बनाया गया है।
उत्तराखण्ड के मुख्यमन्त्री एक तरफ भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेन्स की बात करते हैं दूसरी तरफ सौफीसदी भ्रष्टाचार को प्रश्रय दे रहे हैं। उदाहरण स्वरूप हरीश रावत सरकार में भ्रष्टाचार के तहत जिन 81 स्टोन क्रेशरों को स्वीकृति प्रदान की गई थी उसे पहले निरस्त कर दिया गया लेकिन राज्य के शिक्षामन्त्री श्री अरविन्द पाण्डे जी उन सबको लेकर मुख्यमन्त्री से मिले और मुख्यमन्त्री जी ने उनकी स्वीकृति को बहाल कर दिया। क्या ये बिना भ्रष्टाचार का संभव है ?
जिलाधिकारी हरिद्वार एक अयोग्य व्यक्ति हैं जिनको केवल फोटो खिंचाने और फेसबुक पर छाये रहने का ही ध्यान है, अपने पद में निहित संवैधानिक कत्र्तव्यों का कोई ज्ञान नहीं है और बताये जाने पर भी समझ में नहीं आती है। भारतीय संविधान में संघीय व्यवस्था है जो राज्य और केन्द्र का कार्यक्षेत्र अलग अलग करता है लेकिन जहाँ राज्य की नीति और केन्द्रीय नीति में टकराव हो वहाँ केन्द्रीय नीति को वरीयता दी जाती है। राष्ट्रीय एकता की बात करने वाले उत्तराखण्ड के मुख्यमन्त्री को ये सीधी बात समझ में नहीं आती है।
ऐसी विकट परिस्थिति में मातृ सदन के संत ब्रह्मचारी आत्म्बोधानन्द की तपस्या 07 सूत्रीय संकल्पों को लेकर आज 6वें दिन भी जारी है। अवैध खनन और अवैध स्टोन क्रशिंग का कुछ वीडियो यहाँ प्रस्तुत है। ये विडियो जिलाधिकारी हरिद्वार को बारम्बार भेजा जा रहा है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है क्योकि स्वयं जिलाधिकारी ही तो इन अवैध खनन और अवैध क्रशिंग को प्रश्रय दे रहे हैं।