Press Conference Shri Gurudev

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Shri Gurudev Press Conference

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Plan to kill Br.Aatmbodhanand: taken away from Ashram forcibly ब्र आत्मबोधानंद जी को मारने की तैयारी : जबरन आश्रम से उठाया गया

Aatmbodhanandji being forcibly taken a

ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद को मारने की तैयारी। 11:30 बजे यहाँ से जबरन ले जाया गया है, उसे पीने के लिए पानी तक नही उपलब्ध करवाया जा रहा है, न कोई सेवा करने वाला है और उसे अभी तक एम्बुलेंस में ही रखा है।
उन्हें शारीरिक और मानसिक पीड़ा पहुँचाई जा रही है।
रात भर वे सो नहीं पाए इस आशंका से कि ये लोग कब आ जाएं तथा रातभर कहीं डीजे भी बजता रहा जिसे सूचना देने पर भी बंद नहीं करवाया गया और सुबह में देर से उठने के कारण अपना नित्य नैमितिक कर्म भी नहीं कर पाए थे तथा जल भी नहीं ले पाए थे। जिस समय उन्हें जबरन ले जाया गया उस समय परमादरणीय श्री गुरुदेव स्नान हेतु गंगाजी के तट पर स्नान कर जप कर रहे थे और मैं, ब्रह्मचारी दयानंद, उनके साथ गंगा तट पर ही था।

Today at 11:30 am Br Aatmbodhanand ji was forcibly taken away from Ashram premises. He has not been given even water, nobody to take care of him and he is still kept inside ambulance.
He is being tortured physically and mentally.

Yesterday night he was unable to sleep properly as he was apprehensive of the torture by the administration and police and sound pollution by DJ whole night which was not checked despite informing several times. Hence he got up late in the morning and he couldn’t even complete his daily freshening up duties and even taking water, he was forcefully taken away. At that time Shri Gurudev was doing japa after taking bath at the bank of Ganga and I, Br Dayanand was with him at the bank of Ganga.

तपस्या 08वें दिन जारी रहा

ब्रह्मचारी आत्मबोधानन्द की तपस्या का 8वां दिन है। आज गंगा रक्षा के इस पावन कार्य में ग्राम जगजीतपुर के वासिन्दे दिन भर आते रहे। लगभग 100 से ज्यादा लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई और इस तपस्या के सफल होने की कामना की। इसके अलावा भारतीय किसान यूनियन, जगजीतपुर ग्राम बचाओ संघर्ष समीति एवं जनसंघर्ष मोर्चा के दर्जनों पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं ने भी मातृ सदन आकर लिखित में इस तपस्या को अपना समर्थन प्रदान किया।
दूसरी तरफ खनन व स्टोन क्रेशर माफियाओं का प्रशासन एवं स्थानीय पुलिसकर्मी के साथ अनोखा गठजोड़ सामने आया है। शाहपुर शीतला खेड़ा स्थित एक स्टोन क्रेशर के द्वारा 30×20 मीटर की खेती की भूमि को मशीनों से खोदकर 15 फुट गड्ढ़ा बना दिया गया है और उस समय भी लोडर से अवैध खनन कर माल स्टोन क्रेशर पर ले जाया जा रहा था जिसका प्रमाण विडियो रिकार्डिंग बनाने हेतु उसी गाँव का एक युवा गया तो स्टोन क्रेशर वालों ने उसे पकड़कर उसके साथ हाथापाई कर दी उल्टा पुलिस बुला लिया और उसका मौबाईल छीनकर उस विडियो को हटा दिया और पुलिस के सामने धमकी दी कि कोई उसके काम नहीं आयेगा। युवक ने इसकी शिकायत श्रीमान मुख्य सचिव, श्रीमान पुलिस महानिदेशक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से की है। इस पत्र में इस युवक ने खनन से हो रहे अपूरणीय क्षति का जिक्र अपनी ही भाषा में साफ व स्पष्ट रूप से किया है। इस घटना में एक दारोगा संग तीन पुलिस कर्मियों के नाम आ रहे हैं जो इस प्रकार हैः- अमित रावत, विनोद और राठी, ये तीनों भिक्कमपुर चैकी पर तैनात बताये जा रहे हैं। इन तीनों ने अपने सामने अवैध खनन होते हुए भी उसके विरुद्ध कार्यवाही करने की बजाये स्टोन क्रेशर मालिकों से कृत्य कृत्य होकर उसके गैरकानूनी कार्यों को प्रश्रय दिया।
ऐसी ही एक दूसरी घटना भी सामने आई है। ग्राम भोगपुर का एक किसान का खेत दुर्गा स्टोन क्रेशर से सटे एक खेत से लगा हुआ है। स्टोन क्रेशर से लगे उक्त खेत में राजेन्द्र ने उक्त सटे हुए खेत में 25-30 फीट गहरा गड्ढ़ा कर दिया जिसके कारण बरसात में उक्त किसान का खेत किनारों से धँसना शुरु हो गया। उक्त किसान ने मातृ सदन को बताया कि वह कई बार जिलाधिकारी व अन्य अधिकारी से इसकी लिखित शिकायत कर चुका है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती है। उल्टे खनन करने वाले लोग उसको धमकी देते हैं कि उसके परिवार के लिये ये सब अच्छा नहीं होगा। किसान ने मातृ सदन से अपने खेत को खनन से बचाने का निवेदन लिखित में किया है। कुल मिलाकर यहाँ के जिलधिकारी श्री दीपक रावत और उपजिलाधिकारी श्री मनीष कुमार सिंह माफियाओं के अवैध हित साधने में जोरदार ढंग से लगे हैं। यही कारण है कि बारम्बार प्रमाण के साथ शिकायत के बाद भी अवैधरूप से चल रहे इन स्टोन क्रेशरों को सीज नहीं किया गया है।

ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद की तपस्या आज 7 वें दिन भी जारी, आज एक और स्टोन क्रेशर के अवैध खनन का हृदय विदारक विडियो

ब्रह्मचारी आत्म्बोधानंद की तपस्या आज 7 वें दिन भी जारी रही|आज एक और स्टोन क्रेशर के अवैध खनन का हृदय विदारक वीडियो: किस हिसाब से हरिद्वार की धरती को तालाब में परिवर्तित किया जा रहा है, यह विडियो जिलाधिकारी हरिद्वार को भेजा जा चुका है लेकिन वे कोई कारवाई नही करेंगे क्योंकि ये सब उन्हीं के द्वारा पोषित है|

तीर्थ नगरी] कुँभ नगरी] धर्म नगरी] गंगाद्वार हरिद्वार में समस्त कानूनों को ताक पर रखकर राजनीतिक संरक्षण में धड़ल्ले से जारी सर्वथा अवैज्ञानिक एंव अवैध खनन तथा अवैध स्टोन क्रशिंग का काला कारेबार। तपस्या 6 वें दिन भी जारी |

वीडियो Video
खनन का साक्षात प्रमाण
समस्त कानूनों को टाक पर रख कर रात्रि में खनन

गंगाजी में एक भी पत्थर और बोल्डर उपर से लुढ़ककर नहीं आता है, एक नहीं दो वैज्ञानिक रिपोर्ट इस सत्य को प्रमाणित भी कर चुकी है, फिर भी गंगाजी एवं किनारे के अतिउपजाऊ खेती की भूमि में अवैज्ञानिक और अवैध खनन का कारोबार नहीं रुका। इस अवैध खनन के पीछे मुख्य कारक इन क्षेत्रों, बिशनपुर-बिशनपुरकुण्डी-श्यामपुर-सज्जनपुरपीली-टाण्डाभागमल-टाण्डा महातौली-भोगपुर गंगाजी से 05 किलोमीटर की दूरी के अन्दर स्थित 24 अगस्त 2017 की प्रशासनिक आँकड़ा के अनुसार 44 स्टोन क्रेशर हैं।
उल्लेखनीय है कि दिनांक 26 मई 2011 को माननीय उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने मातृ सदन की विशेष याचिका संख्या 03/2011 को स्वीकार करते हुए कुम्भ क्षेत्र में खनन एवं स्टोन क्रशिंग पर प्रतिबन्ध की पुष्टि की और जिलाधिकारी हरिद्वार को आदेश के अवलोकनों के दृष्टिगत आवश्यक कदम उठाने को कहा। 16 दिसम्बर 2014 को कुम्भ क्षेत्र में खनन एवं स्टोन क्रशिंग पर प्रतिबन्धपरक आदेश में माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली द्वारा बरकरार रखने के पश्चात तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल के आदेश के अनुपालन अपनी संस्तुति शासन को भेजते हुए भोगपुर तक गंगाजी से 05 किलोमीटर की दूरी तक स्टोन क्रेशर को प्रतिबन्धित करने हेतु भेजी, परन्तु गंगाजी का सीना चीड़कर कमाये गये अवैध धन सरकार के नुमाईन्दों और शासन एवं प्रशासनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को पहुँचाकर कोई कार्रवाई नहीं होने दी गई। गंगाजी तथा इस क्षेत्र की पारिस्थितिकी, जैवविविधता, पर्यावरण, वन, जंगली प्राणी, हरे-भरे खैर-पलाश-शीशम आदि के वृक्षों से भरपूर अनादिकाल से विद्यमान कितने ही टापुओं को खनन कर नष्ट किया जाता रहा। केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड (सी0पी0सी0बी0) एवं उत्तराखण्ड प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड द्वारा इस क्षेत्र की वृहद् सर्वेक्षण कराने और खनन पर रोक लगाने के निर्देश जारी किये गये लेकिन वे निर्देश में गंगाजी का सीना चीड़कर कमाये गये अवैध धन के बल पर दबा दिये गये।
अपरिहार्य परिस्थिति में केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड ने संविधान प्रदत्त अपने अधिकार पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 5 के तहत आज्ञापक निर्देश उत्तराखण्ड के अधिकारियों को भोगपुर तक खनन बन्द रखने और माननीय उच्च न्यायालय उत्तराखण्ड के आदेश के अनुपालन में जिलाधिकारी हरिद्वार की सुस्तुति के अनुसार गंगाजी से 5 किलोमीटर की दूरी तक स्टोन क्रेशरों को तत्काल बन्द करने के दिये, परन्तु इस निर्देश का भी उल्लंघन हुआ।
दिनांक 3 मई 2017 को माननीय उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका संख्या में सी0पी0सी0बी0 के निर्देश को सख्ती से लागू करने को कहा तब भी इसे लागू नहीं किया गया। मातृ सदन ने इसके विरुद्ध मा. उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका योजित की और उसमें कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद भी अनुपालन नहीं किया गया। बल्कि वर्तमान जिलाधिकारी हरिद्वार ने अपने जवाब में बचकाना और मुर्खतापूर्ण तर्क प्रस्तुत किये। उदाहरणार्थ जिलाधिकारी हरिद्वार का अपने जवाब में कहना कि जैसा कि जिलाधिकारी हरिद्वार द्वारा अवगत कराया…, प्रश्न उठता है कि क्या जिलाधिकारी हरिद्वार को इतना भी ज्ञान नहीं है कि एक जिला में एक ही जिलाधिकारी होता है फिर कौन जिलाधिकारी इनको अवगत कराया। अन्ततः मानननीय उच्च न्यायालय के द्वारा दिनांक 24 अगस्त 2017 को 24 घण्टा में अनुपालन रिपोर्ट देने के लिये कहने पर प्रमुख सचिव उद्योग श्री आनन्द बर्द्धन ने एक शासनादेश जारीकर माननीय उच्च न्यायालय के आदेश दिनांकित 3 मई 2017 और सी0पी0सी0बी0 के निर्देश दिनांकित 6 दिसम्बर 2016 के अनुपालन में 44 स्टोन क्रेशर बन्द करवाये गये।
इस बीच उत्तराखण्ड सरकार और खनन माफिया एक साथ मिलकर माननीय उच्च न्यायालय नैनीातल के आदेश दिनांकित 3 मई 2017 के विरूद्ध पुनर्विचार याचिका योजित किये और बड़े-बड़े सीनीयर वकीलों को अपने पक्ष में खड़ा किये। माननीय उच्च न्यायालय ने पुनर्विचार याचिका को, चूँकि वास्तविक याचिका श्मशानघाट और ग्रामपंचायत की भूमि का था उसमें सी0पी0सी0बी0 का आदेश हुआ था और सरकार से जवाब नहीं लिया जा सका था, स्वीकार कर अपना पूर्व का आदेश दिनांकित 3 मई 2017 वापस अवश्य लिया लेकिन साफ निर्देश दिया कि सी0पी0सी0बी0 का आदेश यथावत रहेगा, बल्कि शासन-प्रशासन को अवैध क्रशिंग और अवैध खनन के विरुद्ध और सख्त कार्रवाई करने को कहा।
इसके बावजूद पहले तो स्टोन क्रेशरों को तैयार माल बेचने की छूट दी गई और भारी-लेन देन के परिणाम स्वरूप फिर 16/10/2017 को दीवाली का तोहफा देते हुए स्टोन क्रेशरों को पुनः खोल दिया गया। ऐसा करके श्री आनन्द बर्द्धन, प्रमुख औद्योगिक सचिव, ने माननीय न्यायालय में विचाराधीन अवमानना याचिका में दिये गये अभिकथन कि सी0पी0सी0बी0 के निर्देश का अनुपालन कर दिया गया है, का उल्लंघन किया है जिसके विरुद्ध एक और अवमानना याचिका माननीय उच्च न्यायालय में योजित हुई है। वहीं जिलाधिकारी हरिद्वार श्री दीपक रावत ने गंगाजी में खनन खोले जाने की तैयारी की बात पेपर में कथन देकर प्रकाशित करवाया था जो पुनः माननीय न्यायालय में दिये गये अभिकथन की अवमानना है, अतः उनको भी पक्षकार बनाया गया है।
उत्तराखण्ड के मुख्यमन्त्री एक तरफ भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेन्स की बात करते हैं दूसरी तरफ सौफीसदी भ्रष्टाचार को प्रश्रय दे रहे हैं। उदाहरण स्वरूप हरीश रावत सरकार में भ्रष्टाचार के तहत जिन 81 स्टोन क्रेशरों को स्वीकृति प्रदान की गई थी उसे पहले निरस्त कर दिया गया लेकिन राज्य के शिक्षामन्त्री श्री अरविन्द पाण्डे जी उन सबको लेकर मुख्यमन्त्री से मिले और मुख्यमन्त्री जी ने उनकी स्वीकृति को बहाल कर दिया। क्या ये बिना भ्रष्टाचार का संभव है ?
जिलाधिकारी हरिद्वार एक अयोग्य व्यक्ति हैं जिनको केवल फोटो खिंचाने और फेसबुक पर छाये रहने का ही ध्यान है, अपने पद में निहित संवैधानिक कत्र्तव्यों का कोई ज्ञान नहीं है और बताये जाने पर भी समझ में नहीं आती है। भारतीय संविधान में संघीय व्यवस्था है जो राज्य और केन्द्र का कार्यक्षेत्र अलग अलग करता है लेकिन जहाँ राज्य की नीति और केन्द्रीय नीति में टकराव हो वहाँ केन्द्रीय नीति को वरीयता दी जाती है। राष्ट्रीय एकता की बात करने वाले उत्तराखण्ड के मुख्यमन्त्री को ये सीधी बात समझ में नहीं आती है।
ऐसी विकट परिस्थिति में मातृ सदन के संत ब्रह्मचारी आत्म्बोधानन्द की तपस्या 07 सूत्रीय संकल्पों को लेकर आज 6वें दिन भी जारी है। अवैध खनन और अवैध स्टोन क्रशिंग का कुछ वीडियो यहाँ प्रस्तुत है। ये विडियो जिलाधिकारी हरिद्वार को बारम्बार भेजा जा रहा है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है क्योकि स्वयं जिलाधिकारी ही तो इन अवैध खनन और अवैध क्रशिंग को प्रश्रय दे रहे हैं।

Br. Aatmbodhanand ji started Tapasya from today 30th Oct, 2017

MS/2K17/Hdr/221 30-10-2017

वयं राष्ट्रे जाग्रयाम पुरोहिताः
शुक्लयजुर्वेद % 9/23 (Let we Rishis sustain awakening in the country)

To
1- The Honourable President of India,
Rashtrapati Bhawan,
New Delhi.

2- The Honourable Chief Justice,
Supreme Court of India,
New Delhi-110001.

3-The Honourable Prime Minister of India,
7-Lok Nirman Road,
New delhi -110001.

4-The Honourable Chief Justice,
Uttarakhand High Court,
Nainital-263001.

5-The Honourable Governor,
Raj Bhawan, Uttarakhand,
Dehradun.

6-The Honourable Chairman,
National Green Tribunal,
New Delhi – 110001.

Subject: Regarding initiation of Tapasya from today i.e. October 30, 2017.

Honourable Sir,
1- Matri Sadan is a divine organization, which fights against corruption and preserves the environment. Ganga Ji, who also enjoyed the status of our National River, flows in three types of different geographical conditions. Firstly amongst hills, secondly getting down from the hills to plane area and thirdly entire plane area. The area above Rishikesh is of hills where big stones are capable of combat the flow of Ganga, second area is hills last and plane starts but flow of Ganga is very fast and third area is totally plane, where flow of river becomes slow. Haridwar falls in second stage where hills last but still flow is very fast so sand & clay cannot combat this flow. Therefore the earth of Haridwar contains boulders and stones naturally so it is capable of combating the fast flow of Ganga.

2- Scriptures do have its own language to say this great valuable thing. It is said in Puranas that when goddess Ganga was directed by the Lord Vishnu to go to the earth from heaven she becomes very angry and decided in her mind to swept away the entire earth with her fast flow, then Lord Shiva controlled her anger by accepting her in his great hair locks and thus her anger was slowed down. In Mahabharat Mahapuran it is written,

एतस्याःसलिलं मूर्ध्नि वृषांकः पर्यधारयत् |
गंगाद्वारे महाभाग येन लोकस्थितिर्भवेत् || ||9||
महाभारत वनपर्व अध्याय-१४२ श्लोक-०९
Chapter 142 Verse 9. Mahabharat. (Geetapress Gorakhpur publication part-2, Vanparva, book code-33) Meaning by Lord Shiva accepted pious water of Ganga on his head and thus this world was protected. In other words we can say that boulders & stones are the head of Lord Shiva which combat the flow of Ganga from the time immemorial.

3- It is also being said that the Ganga Ji before descending on earth worried very much thinking people of earth will pollute & disrespect her with their selfish acts, at this Lord Brahma assures her that saints will do Tapasya near your banks & they will take care of you. Therefore, it is not only our (true saints) duty cast upon from the very lineage but also the fundamental constitutional duties of the citizen of India enshrined in article 51A (b), (g) & (i) of Indian Constitution.

4- It is the fact and the same has also been substantiated by the Scientists that replenishment of mined out stones and boulders are not possible in the bed & stretch of Ganga Ji in Haridwar, meaninby removal of the same is causing deleterious effects to this Kumbh & Religious city Haridwar. Till this date great loss has been caused to the area destroying ecology & bio-diversity of the same. Several islands containing green valuable Khair & Shesham trees have been destroyed.

5- To protect this Kumbh & Religious city Haridwar two of the saints of this pious ashram has been murdered under a great conspiracy hatched by the mafia in collusion with corrupt political leaders and corrupt government officers.

6- Several directions were issued to the State of Uttarakhand to stop mining activities in this area which ranges from Raiwala to Bhogpur, out of which Raiwala to till the starting boundary of Bishanpur mining & crushing has already been banned in 2010 by the Govt. Order which also confirmed by the Hon’ble Uttarakhand High Court and the Apex Court also did not interfere with the same, but from Bishanpur to Bhogpur mining works continued & so the destruction.

7- When no option left to stop deleterious effects from the mining & crushing in the area a Tapasya was started on 5th November, 2016 and the Ganga Ministry assigned this work to the CPCB Delhi and the CPCB invoking its powers conferred u/s 5 issued directions to stop mining in the said area and close down crushing units situated within 05 kilometers from the boundary of Ganga Ji. But the concerned officers did not comply with the same. Hon’ble Uttarakhand High Court also issued directions in PIL No. 62 of 2017 to enforce the same, but it was not enforced.

8- Last time when mining was started in these area and against the same Matri Sadan started Tapasya on 14th May 2017 with a request to comply the directions issued by the Hon’ble High Court of Uttarkhand and the CPCB Delhi but the Haridwar Administrative Officers and political regime conniving with mafia persons tried to kill our His Holiness Shri Gurudev along with two of our Guru brothers (disciple of the same Guru).

9- Matri Sadan filed a Contempt Application No. 128 of 2017 before the Hon’be Uttarakhnd High Court where the concerned officers first tried their best to misguide the Hon’ble Court and failing to do so a G.O. was issued on 24th August 2017 produced before the Hon’ble Court on 25th August 2017 by which directions of the Hon’ble Court & the CPCB Delhi was complied with.

10- State of Uttarakhand filed a review & same was decided on 14-09-2017 wherein the Hon’ble Court decided to recall its earlier order dated 3rd May 2017 regarding enforcement of directions issued by the CPCB but clearly mentioned in his order that “We have only reviewed our judgment, by which we have given a positive direction to the State to implement the directions of the Central Pollution Control Board. Reviewing of our judgment should not be understood as our having, in any way, interfered with the direction given by the Central Pollution Control Board dated 06.12.2016 or any of the further communication issued by it. We must not be taken to have pronounced on any of the contentions of the parties in regard to the said order. We make it very clear that if any person is aggrieved by the said order, this judgment will not stand in the way of the said person / Authority calling in question the said order in appropriate forum. We make it clear that allowing of the review petitions should not be treated as our pronouncement on the enforceability of the said order.“ Still the Principle Secretary, Industrial Development of this state in utter violation of the abovementioned order recalled his earlier order dated 24th August 2017 and just after that the District Magistrate Haridwar issued permission to operate those stone crushing industries who he himself imposed more than 33 crore fine for doing illegal mining, though while conducting a raid a great corruption had taken place while measuring the depth of ditches made of illegal mining & 30-40 feet depth was limited to only 4 to five feet, but even a penny was not collected from the same.

11- The Government & local administration is promoting illegal mining & illegal crushing giving political protection to the D.M. Haridwar Shri Deepak Rawat, who even did not reply to any our letters till this date.

12- High profiteering trade of illegal mining & illegal crushing captured each & every constitutional and non-constitutional set up including the saints on shoulders moral duties lie to preach the societies.

13- Our His Holiness Shri Gurudev had already written a detailed letter on 09-10-2017 enumerating all these grave issues, but nothing was done and illegal acts in this state continued in advance stage.

14- In this gloomy situation, we, the true saints, have left with no other option but to adopt the path of our ancient vedic tradition of doing Tapasya to get our legitimate & genuine requests fulfilled.

15- Therefore, in the light of above facts & circumstances, I, Brahmchari Aatmbodhanand, initiates Tapasya from today i.e. 30th October, 2017 with following requests:-

I- Directions issued by the CPCB Delhi be complied with.

II- A SIT be constituted to investigate rupees 1 crore & 50 lacs deal, which took place to restart stone crushing violating not only CPCB Delhi but even Hon’ble High Court directions.

III- As per the direction of Hon’ble Uttarakhand High Court dated 26th May 2011 and in compliance of the same recommendations of the D.M. Haridwar dated 16 February 2015 all stone crushing units situated within five kilometers from the bank of Ganga Ji be closed forthwith & this area be notified as no crushing zone & be developed for Organic Farming.

IV- Heavy illegal mining made 30-40 feet ditches in the agricultural fields situated on the bank Ganga and several islands containing green valuable Khair & Sheesham trees were destroyed causing grave ecological disbalance to this area, So a high level enquiry be set up to identify those who have committed these ecological disbalances.

V- D.M. of Haridwar Shri Deepak Rawat Ji be sent on re-training.

VI- Only reputed & tested honest officers be deputed in this Kumbh & religious city Haridwar.

VII- A High Level Expert Committee be set up to evaluate the cost of destruction caused by the officers of Uttarakhand Forest Corporation & Uttarakhand Forest Department by carrying unscientific mining on totally false ground of replenishment, in our opinion it may cross one thousand crore mark and liability be fixed to whom it must be collected and then matter be assigned to the CBI to prosecute the guilty liable persons.

As per the request made by our His Holiness Shri Gurudev in his letter dated 09-10-2017 it is earnestly requested not to disturb my Tapasya.
With due respects.
Yours Sincerely,

(Brahmchari Aatmbodhanand)
Matri Sadan, Haridwar.
Copy to: For information & proper action:-
1- The Hon’ble Minister, MoEF & CC, Govt. of India, New Delhi.
2- The Hon’ble Minister, Ganga Rejuvenation, Govt. of India, New Dehi.
3- The Hon’ble Home Minister, Govt. of India, New Delhi.
4- The Honourable District Judge, District Court, Haridwar.
5- The Hon’ble CM, State of Uttarakhand, Dehradun.
6- Hon’ble Revenue Minister Shri Prakash Pant Ji, Revenue Minister, State
of Uttarakhand, Dehradun.
7- Shri Gyanesh Bharti Ji, Joint Secretary, MoEF & CC, New Delhi.
8- Shri Hardik Shah Ji, PS to the Hon’ble Minister, MoEF & CC, New Delhi.
9- The Chairman, CPCB, Delhi.
10- The Additional Secretary & D.G., NMCG, New Delhi.
11- Shri Surendra Kumar Ji, Scientist ‘G’, Director, MoEF & CC, New Delhi.
12- The Chief Secretary, State of Uttarakhand.
13- The Industrial Development Secretary, Govt. of Uttarkahnd, Dehraudn.
14- The Director, Geology & Mining Unit, Directorate of Industry, Dehradun.
15- The District Magistrate, Haridwar.
16- The SSP Haridwar.
17- The SDM, Haridwar.
18- The S.O., Police Station, Kankhal.
Yours Sincerely,

(Brahmchari Aatmbodhanand)
Matri Sadan, Haridwar.