Shri Gurudev Himself enters into Vigorous Tapasya and resting Br. Atmbodhanand on his 23rd day of Tapasya

परमादरणीय श्री गुरुदेव जी ने उग्र तपस्या की ओर अग्रसर होते हुए ब्रह्मचारी आत्मबोधानन्द जी की तपस्या को समाप्त करवाया।

अवैध खनन के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर 05 नवम्बर 2016 से जारी ब्रह्मचारी आत्मबोधानन्द जी की तपस्या को परमादरणीय श्रीगुरुदेव जी ने विराम दिलवाते हुए कहा कि दिनांक 30 नवम्बर 2016 से लेकर अब तक 42 एसएमएस जिलाधिकारी हरिद्वार सहित अन्यों को भेजा गया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। आज भी गंगा किनारे टाण्डाभागमल और टाण्डामहतौली में पोकलैण्ड और जेसीबी मशीनों से खनन जारी है। इस बीच श्री हरीश रावत जी ने 1951 से खनन प्रतिबन्धित क्षेत्र रायवाला से अजीतपुर बन्धा में खनन पर लगा प्रतिबन्ध हटाने का निर्णय ले लिया। इसी बीच प्रशासन स्वास्थ्य खराब दिखाकर स्वामी निगमानन्द सरस्वती जी की तरह ही ब्रह्मचारी आत्म्बोधानन्द जी की हत्या करने का षडयन्त्र कर रहा था। ऐसी परिस्थिति में श्री गुरुदेव जी ने एक पत्र महामहिम राष्ट्रपति, माननीय मुख्य न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय, माननीय प्रधानमन्त्री, माननीय मुख्य न्यायाधीश एवं माननीय राज्यपाल उत्तराखण्ड को 225 पृष्ठ का प्रमाण सहित लिखकर संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन कर गंगाजी को नष्ट करने के सम्बन्ध में अवगत कराते हुए नष्ट हुई संवैधानिक व्यवस्था को बरकरार करने या फिर पत्र प्राप्त होने के 07 बाद वैदिक रीति का अनुसरण कर कठोर से कठोर तपस्या कर अपने आत्मा में लय लेने की स्वीकृति पर निर्णय से अवगत कराने  का अनुरोध किया था। मा. प्रधानमन्त्री कार्यालय को छोड़कर और महानुभावों को वह पत्र 25 नवम्बर और 26 नवम्बर को प्राप्त हो चुका है। ऐसे में श्री गुरुदेव जी ने आज से संयम व्रत शुरु कर दिया है जिसके तहत श्री गुरुदेव जी ने अन्न का त्याग कर दिया है। आज से 07 दिन तक कोई उत्तर प्राप्त नहीं होने पर श्री गुरुदेव जी ये समझेंगे कि उनको वैदिक रीति से शरीर का अतिक्रमण कर अपनी आत्मा में लय करने की स्वीकृति दे दी गई है और श्री गुरुदेव जी उग्र उग्र तपस्या, जिसमें प्रथम कुछ समय जल ग्रहण कर और फिर जल का परित्याग कर अपनी आत्मा में लय करने हेतु अग्रसर होंगे

Inclining himself towards higher stage Tapasya His Holiness Shri Gurudev rested Brahmchari Aatmbodhanand’s Tapasya.
Resting Brahmchari Aatmbodhanand Tapasya going on since 05th Nov 2016 for getting action taken against ongoing illegal mining His Holiness said that 42 sms were sent to the D.M. Haridwar and others but no action was taken against illegal mining. Illegal mining is continued even today on the bank of Ganga at Tanadamehtauli & Tandabhagmal by Pokland & JCB machines. In the meantime Shri Harish Rawat Ji, CM Uttarakhand decided to lift ban on mining from Raiwala to Bhogpur, out of that Raiwala to Ajeetpur Bundha had a complete ban on mining since 1951. In the meantime administration was hatching plots to kill Brahmchari Aatmbodhanand on the pretext of his falling health, same way they killed Swami Nigmanand Saraswati in 2011. In this circumstances His Holiness had sent a letter consisting 225 pages to the Hon’ble President, the Hon’ble Prime Minister, the Hon’ble Chief Justice of India, the Hon’ble Chief Justice of Uttarakhand & the Hon’ble Governor Uttarakhand with a request to either reinstate the lost dignity of the Constitution in Uttarakhand or let him permit to dissolve his body to enter in his soul by doing high to higher stage Tapasya in a pure Vedic method within 07 days of receiving that letter. Updates are of receiving that letter in all offices except the Prime Minister Office on 25 Nov & 26 Nov 2016. In this situation His Holiness Shri Gurudev inclined towards high stage Tapasya by restricting his diets, from today he will accept only fruits & vegetables. Getting no answer in next seven days His Holiness will suppose that permission to dissolve his body to enter in his soul in a pure vedic method is granted and His Holiness will start his high to higher stage Tapasya by taking only water for some time and then leave the same to entering his soul.

 

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