Shri Gurudev seeking permission to dissolve His body from custodians of Indian Constitution

Raising following five points His Holiness Shri Gurudev in futherence of his declaration made on 17-11-2016 sent a letter to The Honourable President of India, The Honourable Chief Justice of India, The Honourable Prime Minister of India, The Honourable Chief Justice of Uttarakhand High Court and The Honourable Governor, Uttarakhand. This letter contain 225 pages, pages1-25 contain main contents and rest 200 pages are evidencial documents annexed therein. A copy of that letter is also forwarded to the Ganga Rejuvenation Ministry Saadhvi Sushri Uma Bharti Ji, the MoEF & CC Minister Shri Anil. R. Dave Ji, C.M.Uttarakahnd Shri Harish Rawat Ji, Chief Secretary Uttarakhand, AICC President Smt. Sonia Gandhi Ji, Vice-President Shri Rahul Gandhi Ji and General Secretary & Uttarakhand Incharge Smt. Ambika Soni Ji.

i- Has Shri Harish Rawat Ji the power to act according to his whims or he has to follow the norms of constitution?

ii- Is state Government free to take decision to destroy the property of state which is coming therein from the time immemorial and is necessary to get protected and preserved for the coming generations of not only our country but entire world?

iii- Can order of Hon’ble Apex Court, Hon’ble High Court and Hon’be National Green Tribunal, directions of CPCB, UEPPCB and enquiry reports of MoEF & CC ignored on the whims of Shri Harish Rawat Ji like people in power?

iv- Can a minister like Shri Surendra Singh Negi, who termed the NGT ‘a scared beast’ give report regarding those issues which are needed to be get decided scientifically by a team of scientists?

v- After all what will prevail, our constitution or whims of Shri Harish Rawat Ji like people whose sole intention is to accrue illegal wealth even by destroying Ganga and its age old ecology & bio-diversity?

Letter was concluded with following requests: –

Since all of you Honourables are custodian of Indian constitution, therefore, in the light of above facts and circumstances, all of you Honourables are requested to either reinstate the lost dignity of constitution in this state Or
Please allow me to dissolve my body to enter into my soul by adopting the path of high to higher stage Tapasya in a pure vedic tradition. If after receiving of this letter you will not respond within one week it will be construed as permission granted and I will start my high to higher stage tapasya believing you honourable have permitted for the same.

निम्नलिखित पाँच बिन्दुओं को उठाते हुए प्रात स्मरणीय परमादरणीय श्री गुरुदेव जी ने अपनी पूर्व घोषणा दिनांक 17.11.2016 के क्रम में 225 पृष्ठों का एक पत्र महामहिम राष्ट्रपति, माननीय मुख्य न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय, माननीय प्रधानमन्त्री भारत सकार माननीय मुख्य न्यायाधीश उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय एवं माननीय राज्यपाल उत्तराखण्ड को आज प्रेषित की है। पत्र के प्रथम 1 से 25 पृष्ठों में विषय वस्तु लिखा गया है और 200 पृष्ठों में उसके प्रमाणस्वरूप संलग्नक दस्तावेज संलग्न किये गये हैं। पत्र की प्रतिलिपि गंगा पुनर्जीवन मंत्री साध्वी सुश्री उमा भारती जी, केन्द्रीय प्र्यावरण मंत्री श्री अनिल आर दवे जी, मुख्यमन्त्री श्री हरीश रावत एवं मुख्य सचिव उत्तराखण्ड शासन के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गाँधी जी, उपाघ्यक्ष श्री राहुल गाँधी एवं महासिचव उत्तराखण्ड प्रभारी श्रीमती अम्बिका सोनी जी को भी प्रेषित की गई है।

1. क्या श्री हरीश रावत जी को अपनी इच्छा के अनुसार कार्य करने का अधिकार है या उनको संवैधानिक व्यवस्थाओं का पालन करना होगा?

2. क्या राज्य सरकार को अनादिकाल से चली आ रही राज्य की सम्पत्ति जिसका संरक्षण एवं संवर्द्धन भारत ही नहीं पूरे विश्व के आने वाली नई पीढ़ियो के लिए आवश्यक है, को नष्ट करने का अधिकार है?

3. क्या श्री हरीश रावत जी के जैसे सत्तासीन लोगों के इच्छा के अनुरूप मानननीय सर्वोच्च न्यायालय, माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल और माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण नई दिल्ली के आदेश एवं केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड एवं उत्तराखण्ड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड के निर्देश और केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय के रिपोर्टां को दरकिनार किया जा सकता है?

4. क्या जिस विषय का निष्कर्ष वैज्ञानिकों के दल द्वारा निकाला जाना है उस विषय का निष्कर्ष राष्ट्रीय हरित अधिकरण को एक भयानक जानवर कहने वाले मन्त्री श्री सुरेन्द्र सिंह नेगी जी निकाल सकते हैं?

5. अन्ततः आखिर प्रधानता किसको दी जाएगी? भारतीय संविधान की या फिर अवैध धन ऊपार्जन की एकमात्र इच्छा हेतु अनादिकाल से चली आ रही गंगाजी की पारिस्थितिकी और जैवविविधता को भी नष्ट करने वाले श्री हरीश रावत जी के जैसे लोगों के इच्छा की?

पत्र की समाप्ति इन निवेदनों के साथ किया गया हैः –

आप सभी महानुभाव भारतीय संविधान के संरक्षक हैं, अतः उपरोक्त तथ्यों व् परिस्थितिथियों के आलोक में आपसे निवेदन किया जाता है कि
या तो
इस राज्य (उत्तराखण्ड) में खोई हुई संवैधानिक गरिमा को पुनः स्थापित करने का कष्ट करें
या
मुझे वैदिक मार्ग का अनुसरण कर कठोर से कठोरत्तम तपस्या कर शरीर को त्यागकर अपनी आत्मा में लय करने की स्वीकृति प्रदान करें। अगर एक सप्ताह के अन्दर आप प्रतिक्रिया नहीं देते हैं तो यह स्वीकृति दिया समझाा जायेगा और मैं आप सबकी सहमति मानते हुए अपनी कठोर से कठोरत्तम तपस्या शुरु कर दूंगा|⁠⁠⁠⁠

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