इच्छा मृत्यु की मांग

जब माननीय सर्वोच्च न्यायलय, मानानीय उच्च न्यायालय, माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण नई दिल्ली, वैज्ञानिक रिपोर्टों और माननीय पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों को दरकिनार कर दिया जाता है तथा एक मंत्री (उत्तराखण्ड सरकार) संवैधानिक संस्था राष्ट्रिय हरित अधिकरण को खुलेआम भयानक जानवर कहते हैं और वही मंत्री सर्वथा झूठी रिपोर्ट कैबिनेट में देते हैं और कैबिनेट के सदस्य समस्त तथ्यों की जानकारी होते हुए भी सत्य को दबाकर तीर्थ नगरी, कुम्भ नगरी और धर्म नगरी हरिद्वार को नष्ट करने के लिए वर्षों पहले खनन पर लगी रोक को एक क्षण में हटाने का निर्णय ले लेते हैं, जिलाधिकारी हरिद्वार दिन रात लगातार अवैध खनन करवाते हैं, सूचना देने पर कोई कार्यवाही नहीं की जाती है, इसके विरुद्ध तपस्या पर बैठे ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद को उठाकर जान से मारने का प्रयत्न किया जाता है और वर्त्तमान में नाना प्रकार की पैंतरे- बाजी उनको उठाकर स्वामी निगमानंद की तरह मारने की की जा रही है, ऐसे समय में भारतीय संविधान एवं संवैधानिक संस्थाओं के आदेशों तथा कुम्भ, तीर्थ एवं धर्म नगरी हरिद्वार के रक्षार्थ श्री गुरुदेव (परमाध्यक्ष मातृ-सदन आश्रम हरिद्वार) महामहिम राष्ट्रपति, माननीय मुख्य न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय, माननीय मुख्य न्यायाधीश उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय, माननीय प्रधानमंत्री, माननीय राज्यपाल महोदय (उत्तराखण्ड ) से इच्छा मृत्यु की मांग करते हैं जिसके तहत उच्च से उच्चतर तपस्या कर श्री गुरुदेव अपनी आत्मा में लय कर जायेंगे| यदि एक सप्ताह के अन्दर उनकी कोई प्रतिक्रया नहीं होती है तो, यह उनकी भी मौन स्वीकृति मानी जायेगी तदनंतर इस संकल्प के अनुरूप श्री गुरुदेव कार्य करेंगे|

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