“देशवासियों से “गंगा रक्षार्थ” विनम्र अपील”

द्वारा श्री राजकुमार झा

माँ गंगा भारतीय संस्कृति की अनमोल धरोहर है । भारतीय संस्कृति की प्राण तत्व है । गंगा का जल निर्मल और पवित्र है तथा इसकी तुलना किसी अन्य जल से नहीं की जा सकती है । इसका आज भी वही महत्व है जो अनादिकाल में था । भारतीय जनमानस द्वारा गंगाजल का उपयोग करने की परम्परा अनादिकाल से होता आ रहा है । किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में गंगाजल का प्रयोग बहुत ही श्रद्धा तथा भक्ति के साथ की जाती है । धर्मशास्त्र का मत है कि मृत्यु के समय अगर गंगाजल का एक भी बुन्द मुख में चला जाय तो जीवात्मा जन्म-मृत्यु के आवागमन से सदा के लिए मुक्त हो जाता है ।
हरिद्वार स्थित “मातृसदन” विगत् २० वर्षों से गंगा की स्वच्छता तथा अविरलता को लेकर संघर्ष करती आ रही है । मातृसदन के परमाध्यक्ष पूज्यवर श्री गुरूदेवजी के पावन मार्गनिर्देशन व नेतृत्व में गंगाजी में हो रहे अबैध खनन को लेकर आश्रम के संत अनशन रूपी तपस्या के माध्यम से राज्य और केन्द्र सरकार का ध्यान आकृष्ट करते आ रहे हैं । 
विदित हो कि गंगा रक्षार्थ मातृसदन के तेजस्वी संत गंगापुत्र स्वामी निगमानन्द सरस्वतीजी ने १३ जून, २०११ को न्यायिक भ्रष्टाचार हटाने, गंगा और पर्यावरण रक्षार्थ अपनी आहूति दी ।
पूज्यवर श्री गुरूदेवजी ने सभी राजनैतिक पार्टियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि – सभी राजनैतिक पार्टियां गंगाजी के प्रति असंवेदनशील ही नहीं बल्कि गंगा का दोहन करने में लगी हुई है । अपने भौतिक भोगेच्छाओं की पूर्ति के लिए गंगाजी को पूरी तरह प्रदूषित किया जा रहा है । मातृसदन का प्रमाणिक आरोप है कि उत्तराखंड की सरकार तथा खुद मुख्यमंत्री श्री हरीश रावतजी खनन माफियाओं से गठजोड़ करके अबैध खनन की अनुमति देकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना कर रही है । माननीय सर्वोच्च न्यायालय का स्पष्ट आदेश है – “स्टोन क्रशर की स्थापना आबादी वाले जगह से ३ किलोमीटर दूर की जानी चाहिए साथ ही माननीय उत्तराखंड उच्च न्यायालय का भी निर्देश है कि ५ किलोमीटर की दूरी पर स्टोन-क्रेशरों की स्थापना होनी चाहिए । इन आदेशों के बाबजूद भी मुख्यमंत्री हरीश रावतजी के निर्देशन पर खनन माफियाओं द्वारा धड़ल्ले से गंगाजी में खनन कार्य अबाध गति से जारी है ।

देश के सभी प्रबुद्ध और जागरूक नागरिकों से विनम्र निवेदन है कि  पूज्यवर श्री गुरूदेवजी के मार्गनिर्देशन में खनन माफियाओं के विरूद्ध तथा प्रदेश सरकार द्वारा गंगाजी को नष्ट करने जैसी कुकृत्य के विरोध में योगदान देकर आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक दायित्वों का निर्वहन कर राष्ट्र की मर्यादा को अक्षुण्ण बनाये रखने का संकल्प लेवें ।विदित हो कि आश्रम के संत ब्रह्मचारी आत्मबोधानन्दजी का अविछिन्न अनशनरूपी सत्याग्रह विगत् ५ नवभ्बर, २०१६ से प्रारंभ हो चुका है । देशवासियों से निवेदन है कि मातृसदन को अपना समर्थन और सहयोग देते हुए  राज्य सरकार के दमनकारी नीतियों का पुरजोर विरोध करें । जय श्री हरि ।

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