Bulletin 9March 2016

image

image

image

image

Advertisements

One thought on “Bulletin 9March 2016

  1. “प्रशासन शक्ति दे सकती है, संस्कार नहीं”
    ********************************

    हरिद्वार के एस डी एम साहेब !
    महाशिवरात्रि के दिन “मातृसदन” के पवित्र आश्रम में आपकी मानसिक और शारिरीक भंगिमा देखने लायक थी । सरकार ने आपको ऊँचे ओहदे पर सेवा के लिए नियुक्त किया है, नहीं कि प्रशासनिक शक्ति प्राप्त कर उदंड, उपद्रवी तथा उन्मादी प्रवृति को प्रदर्शित करते हुए आतंक का वातावरण निर्मित कर, आपने सत्य के मार्ग का अनुसरण करने वाले देवतातुल्य ऋषिश्रेष्ठ पूज्यवर श्री गुरूदेवजी की तपस्थली तथा “गुरूनिवास” के मुख्य दरवाजे को जिस प्रकार अपने गुर्गों के द्वारा तोड़ने का आदेश दिया इसका परिणाम आपको अवश्य भुगतना होगा । आपके लिए आध्यात्मिक संदेश है कि अगर आप सनातनी हिन्दू हैं तो क्या इस प्रकार बर्बर और अनाचारपूर्वक आदेश निर्गत करते समय यह नहीं सोचा कि संत भगवान और आश्रम के प्रति कैसा व्यवहार और आचरण किया जाना चाहिये ?
    “मातृसदन साधनास्थली और पूण्यस्थली है एस डी एम साहेब ! आश्रम में लोककल्याण के लिए साधना की जाती है, करूणा, प्रेम और संस्कृति की रक्षा के लिए निस्वार्थ भाव से प्रकृति प्रदत्त सभी अवयवों की मंगलकामना के लिए तप की जाती है । हरिद्वार की अन्य आश्रमों की तरह भौतिकवादी ऐश्वर्य और वैभव का प्रदर्शन नहीं होता “मातृसदन” में । मेरा सुझाव है कि आप जब फुर्सत में हों एकांत में बैठकर महाशिवरात्रि की घटना का अवश्य आत्मचिंतन करें । जब आप आत्मचिंतन करेंगे तो आपकी कानों में पूज्यवर श्री गुरूदेवजी की पवित्र वाणी अवश्य सुनाई पड़ेगी । आपने जिस प्रकार से बल-प्रयोग किया उसके परिपेक्ष्य में पूज्यवर श्री गुरूदेवजी की वाणी – “माननीय एस डी एम साहेब ! दुनिया में जितनी भी बल है, उसमें सबसे कमजोर बल है, आसुरी बल है, पाशविक बल है । शिवरात्रि का दिन है, हम शिव भक्त हैं, शिव की जटा से गंगा निकलती है आदि….आदि……।”
    पूज्यवर श्री गुरूदेवजी के श्रीमुख से निकला एक-एक शब्द आपके हृदय को व्यथित करता होगा । आपने मनुष्य शरीर पाया है । परमात्मा की अराधना, संस्कार में सूचिता, श्रेष्ठ कर्तव्य तथा सच्चे संत के सानिध्य में लौकिक और पारलौकिक पूण्यों के संरक्षण से ही जीवन और शरीर धारण करने का अधिकारी बनने का सौभाग्य प्राप्त करना सीखें । आपके द्वारा किया गया कृत्य वीडियो में कैद है । संस्कृति की रक्षा के लिए, गंगाजी की रक्षा के लिए, धर्म की रक्षा के लिए तथा कुम्भ क्षेत्र की रक्षा के लिए अगर सरकार सकारात्मक कदम नहीं उठाती है तो एक राष्ट्रभक्त होने के नाते क्या आपका कर्तव्य नहीं बनता कि शासन-प्रशासन की बातों को अनसुनी करते हुए आत्मा की आवाज पर आततायी सरकारी आचरणों के विरूद्ध विद्रोह की आवाज को बुलंद किया जा सके ? मेरा परामर्श है कि आपने जो पाप किया है इसके प्रायश्चित के लिए आप गुरू शरणागत हो जाए । जब आप गुरू शरणागत हो जाएंगे तभी आपको अपने किये गलती का अहसास होगा और आप समझ पाएंगे कि मैंने क्या कर दिया ? जय श्री हरि ।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s